कल मेरे एक अज़ीज़ दोस्त (आकाश) ने
मेरा पिछला ब्लॉग पङने के बाद मुझसे कहा कि
एक लेख़क को निष्पक्ष होना चाहिये, वह मेरे
विचारों से तो सहमत था लेकिन, उसे
लगा कि उस ब्लॉग में मैने एक चुनावी पार्टी के
पक्ष में लिखा है। तो मैनें
सोचा कि आज उसकी शिक़ायत को दूर करने
की कोशिश करता हूँ।
रात क़ाफी देर तक सोचने के बाद मुझे आज के
हमारे एक फाङू नेता की याद आ
गयी जिन्हे फाङने का बहुत शौक़ है,
कभी किसी पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र
फाङते हैं, तो कभी अपनी ही सरकार
का लाया हुया अध्यादेश। उन्हे देख कर ऐसा
लगता है, कि वोह राजकुमार साहब के काफी बङे
प्रसंशक हैं। राजकुमार साहब से याद
आया आज उनकी 17वीं पुण्यतिथी है। जोकि अपने
संबादों से अपनी फिल्मों के विलेन
के साथ भी ऐसा ही किया करते थे।
राजकुमार साहब से उनकी तुलना इसलिये कर
रहा हूँ क्योंकि जब
वोह घोषणा पत्र फाङने के बाद एंग्री यंग मैन ने
जो पोज़ दिया था उसे देख़ कर
मेरे डैडी ने एक लफ्ज़ बोला था कि साला राजकुमार
बन रहा है। बाद में उस पोज़
को दोबारा देखने बाद मुझे कुछ हद तक सच्चाई
सी लगी।
लेकिन अध्यादेश को फ़ाङने की बात कहने
का अन्दाज़ देख कर मुझे एक क़हावत
(ख़िसियानी बिल्ली, ख़म्भा नोचे) याद आ गई।
ऐसा लगता है, जैसे राहुल जी अपनी
नाक़ामयाबी से क़ाफी ख़िसियाऐ हुए हैं, जोकि उन्हे
बिहार और उत्तरप्रदेश में
मिली थी। दूसरी ख़िसियाहट कि अब उन पर
रातों रात पॉपुलर बना देने वाली मीडिया
का फोक़स कम हो गया है।
शायद इसिलिये उन्होंने प्रेस कॉफ्रेंस मे एक
ड्रामेटिक एन्ट्री ली जिससे
मीडिया का फोकस उन्हे मिल सके जो वाख़ूबी काम
आया। राहुल जी से कहुँगा कि
ख़िसियाना और फ़िल्में देखना कम करिये और मुल्क़
की तरक्की के बारे में सोचिये।
ख़ैर इस वाक़िये से बॉलिवुड को खुश
होना चाहिये कि फ़िल्मों का
असर अब नेताओं पर हो रहा है। क़ाश हमारा हर
नेता ‘नायक़’ के अनिल कपूर और
‘पा’ के अभिषेक जैसा हो जाये, तो हमारा मुल्क़
वाक़ई तरक्की कर जाये।
पता नही आकाश की शिक़ायत दूर हुई
या नही? वोह तो अब वही बतायेगा। मैने
तो अपनी तरफ से पूरी क़ोशिश की।
चलता हूँ। कमियाँ बताते रहिये और दुआ
कीजिये कि आगे भी कुछ लिखता रहूँ।
ज़ीशान अली !!
No comments:
Post a Comment