आज अख़बार में आग़ामी विधानसभा चुनाव पर पङ रहा था। पङते-पङते अचानक ख़याल
आया कि आख़िर मैं किस पैमाने पर अपना पहला वोट दूँ? अपने क्षेत्र के उम्मीदवार
की छवि पर, उसके द्वारा क्षेत्र के लिये किये गये कार्य पर (जोकि बहुत मायने
रखता है) या फ़िर उसके चुनाव निश़ान(पार्टी) पर?
चुनाव में अभी लगभग दो महीने का वक़्त है,
इसलिए ज़्यादा नही
सोचा और वैसे भी किसी महान शख़्स ने कहा है
कि जो सोंचते हैं वोह सोंचते रह
जाते हैं। इसलिये मुझे जो करना होता है बिना सोंचे
कर देता हूँ जोकि ग़लत है,
लेकिन ऐसा करने से मन में कोई कनफ़्यूज़न
नही होता। अगर हम कोई काम करते हैं
तो उसके दो ही नतीजे होते हैं, या तो हम उसमें
क़ामयब होते हैं या नाक़ामयाब।
और नाक़ामयबी से हमें डरना नहीं चाहिये,
ऐसा मेरा मानना है आपकी राय अलग हो
सकती है।
वैसे मैं तो उपर दिये तीन में से दो पैमानों पर
वोट करुँगा।
अपने उम्मीदवार की छवि और क्षेत्र
की तरक्की मे उसके योगदान को। उसके चुनाव
निश़ान और दल को नहीं। आप
लोगों को भी यही सलाह देना चाहुँगा।
वाक़ि आपका अपना
विवेक और मत है, आपको जायज़ लगे आप
वही करें, किसी के बहकाने या सलाह पर ना
जायें, क्योंकि यात्री अपने सामान के ख़ुद
ज़िम्मेवार हैं।
चलता हूँ, ग़लतियाँ गिनाते रहिये।
शुक्रिया !
ज़ीशान अली !!
No comments:
Post a Comment